shayari urdu for friends || best urdu shayari


V.Ahmed





ज़रा सा वक़्त जो बदला तो हम पे हँसने लगे...

हमारे काँधे पे सर रख के रोने वाले लोग।।



मैय्यत को अब उठाके ठिकाने लगाइए,

मौके के सब गवाह हुए क़ातिलों के साथ..




तेरे हाथ को लेकर अपने हाथ में चलना

मेरी खुवाहिश ही नहीं दुआ भी है

...





ना जाने कौन सी साजिशो का हम शिकार हो गए,

जितना दिल साफ रखा उतने ही दाग़दार हो गए ..





क़ासिद पयाम ए शौक़ को देना बहोत न तूल 

कहना फक़त ये उनसे कि आँखें तरस गईं ।




बरसों हुए न तुम ने किया भूल कर भी याद 

वादे की तरह हम भी फ़रामोश हो गए ।






बिछड़ कर फिर मिलेंगे

यकीन कितना था,


ख़्वाब ही था मगर

हसीन कितना था ..!!





जिस कदर खुश लग रहें हैं, 

हैं नहीं हम!

यार तू तस्वीर बढ़िया खींचता है.







हम चाय पीकर कुल्हड़ नहीं तोड़ पाते,


दिल तो खैर , बहुत दूर की बात हैं ...!!!








ये शीशे ,ये ख़्वाब ,ये रिश्ते , ये सांस...

किसे क्या ख़बर कहां टूट जाएंगे।।






घुटन से ना मर जाएं मेरे सभी दोस्त 


इसलिए लगाया नहीं मैंने कभी बटन आस्तीन का...!!







शायरी करने के लिए कुछ खास नहीं चाहिए ।।

बस एक यार चाहिए वो भी दगाबाज चाहिए ।।






जब बिछडने का उसे कोई बहाना ना मिला

उसने माज़ी की लडाई को दोबारा छेडा 🖤


شـــــام بخـــير 🖤✨🥀






मिजाज में थोड़ी सख्ती भी जरूरी है जनाब.....


लोग पी जाते अगर समुन्दर खारा ना होता..!!







ओ जाने वाले आ कि तेरे इंतजार में 


रस्ते को घर बनाए जमाने गुजर गए







मिट्टी की मोहब्बत में हम आशुफ्त़ा सरों ने 


वो क़र्ज़ उतारे हैं कि वाजिब भी नहीं थे ।







साँसों को छलनी जिगर को पार करती है।

ख़ामोशी भी बड़े सलीक़े से वार करती है।।






फूल टूट गया शाख़ से अच्छा हुआ वरना...

पत्तों को ग़लत फ़हमी थी ख़ुशबू उन्ही से है।।







मत पूंँछ कि हम ज़ब्त की किस राह से ग़ुज़रे


ये देख कि तुझ पर कोई इल्ज़ाम न आया ।








होते अगर पास तो कोई शरारत करते,

लेकर तुम्हें बाहों में मोहब्बत करते,

देखते तेरी आँखों में नींद का खुमार,

अपनी खोयी हुई नींदों की शिकायत करते।






लुटा चुका था जिन पर मैं दुनिया की दौलतें,

उन वारिसों ने मुझको कफन भी नाप कर दिया...






मैं मोहब्बत के इरादे से नहीं आया हुं,

मैं फ़क़त शेर सुनाऊंगा और चला जाऊंगा.






तबीब यूं कोशिश न कर__तुझे क्या ख़बर मेरे मर्ज़ की,


तू इश्क़ कर__फ़िर चोट खा__ फ़िर लिख दवा मेरे दर्द की 💔








वो भी तड़प ना जाये तो इस इश्क़ पे लानत,

बस मुझसे एक बार निग़ाह मिलाने की देर है.





** दिल और दिमाग को आपस में लड़ा देते हैं...

 

 ** उसके ख्याल मेंरी मुश्किलें और बड़ा देते हैं...






बड़ी बे-लगाम सी हो गई है आंखे,,

तेरी दीदार के मुसलसल बहाने ढूंढती है !!






दिल है कि तेरी याद से ख़ाली नहीं रहता,,


                      शायद ही कभी मैं ने तुझे याद किया हो !!

_____________________💟






कोई ताल्लुक है गहरा जो खत्म नहीं होता,

हमने देखा है उनसे किनारा करके भी






Roya karoge ap bhi pahron isi tarah......

Atka kahin jo apka bhi dil meri tarah....







मुझे मुझसे ज़्यादा कोई नहीं जानता...

मैं टूट जाने के बाद भी हार नहीं मानता।।





आदम से चल रहा है ख़ताओं का सिलसिला..

औलाद अपने बाप के नक्शे कदम पर है।।






तसल्ली से पढा होता तो समझ मे आ जाते हम

कुछ पन्ने बिना पढे ही पलट दिये है तुमने..







चलो फिर काग़ज़ों पर दास्ताने दर्द लिखते हैं 

ज़माना मुन्तज़िर होगा ग़मों पर मुस्कराने का 

...






हर एक की पसंद के मुताबिक़ नहीं हूँ मैं...

कड़वा ज़रूर हूँ पर मुनाफिक़ नहीं हूँ मैं।।





ज़रूरत मन्द को दहलीज़ से ख़ाली ना लौटाओ 

'रब' के नाम पर देने से दौलत काम नहीं होती 

...








जहाँ वाले उसे जब याद करना भूल जाते हैं

ज़मीनों की तहों में कोई हलचल भेज देता है





ज़रूरत मन्द को दहलीज़ से ख़ाली ना लौटाओ 

'रब' के नाम पर देने से दौलत काम नहीं होती 

...






जहाँ वाले उसे जब याद करना भूल जाते हैं

ज़मीनों की तहों में कोई हलचल भेज देता है






हमें नहीं क़ुबूल किसी और से तेरा ताल्लुक़ 


नफ़रत भी कीजिए तो फक़त हम से कीजिए






एक सुकून सा मिलता है….तुझे सोचने से भी

फिर कैसे कह दूँ…मेरा इश्क़ बेवजह सा है,





आ बैठ करीब मेरे तुझ पर कुछ अल्फ़ाज़ लिखूं..!!


लिखूँ दिल का सुकून तुझे या खुबसुरत ख़्वाब लिखूँ....!!






पुराना होकर ख़ास होता जा रहा है ❤️💕❤️

बड़ा बेशर्म है ये इश्क़ बेहिसाब होता जा रहा है





बड़े अदब से पेश आ रही है ज़िन्दगी...

लगता है फिर कोई दिल्लगी करने के फिराक़ में है।।





कोई तो हो जो मुझे सर-ए-आम बुरा कहे,

मैं भी तो देखूं हिमायत में कौन आता है.





तकब्बुर करने वालों की कभी इज़्ज़त नहीं होती,


 वो डाली टूट जाती है जो झुकना छोड़ देती है!





हमारे दर्द की उम्रें दराज कर दी गई....

हमारे पास मसाइल का हल ना था।।






तस्वीर उस अमीर की लाखों मे बिक गयी..,

जिसमें बगैर रोटी के बच्चा उदास था

...





ये उनका ज़र्फ़ है बैठे हैं आस्तीनों में...

ये मेरा ज़र्फ़ है के यार, यार कहता हूं।।





इस शहर के अंदाज अजब

देखे हैं,

गूंगों से कहा जाता है बहरों

को पुकारो...





हौसले भी किसी हकीम से कम नहीं होते,

हर तकलीफ़ में ताकत की दवा देते हैं





❤..उसकी यादों ने,

              पकड़ रखा है अब तक.........🌹


❤..और.....उसका इश्क़ ,

              रिहाई माँग रहा है हमसे..........🌹





۔منصب ﻋﺸﻖ ﮐﺎ ﺍﻋﺰﺍﺯ ___ ﮐﺴﯽ ﮐﻮ ﺗﻮ ﻣﻠﮯ 

ﻣﯿﮟ ﺗﻮ ﯾﻮﺳﻒ ﻧﮧ ﺑﻨﺎ، ﺗﻮ ھﯽ ﺯﻟﯿﺨﺎ ھﻮﺟﺎ


मनसब ए इश्क का एजाज किसी को तो मिले

मैं तो यूसुफ ना बना____ तू ही जुलेखा हो जा





तुम्हारी याद पर ही बस नहीं चला वरना..

.

किसी को भूलने में कितनी देर लगती है...





मैंने अपनी औक़ात को बड़े क़रीब से देखा

चंद सांसें हैं जो 'रब' की मोहताज हैं

...




अगर ये जानना चाहो !

कोई कैसे बिखरता है ?

बिखर के कैसे जीता है?

चमन में तुम चले जाना !!




वो बुलंदियाँ भी किस काम की जनाब,

जहाँ इंसान चढ़े और इंसानियत उतर जाये ...




कोई सदा उरूज पे रहता नहीं यहाँ..

इस बात की ये डूबता सूरज मिसाल है।।





एक तेरा ही ख्याल है मेरे पास 

वरना अकेले बैठकर कौन मुस्कुराता है।




अज़ान हुई और "अल्लाह"के घर चल दिये !

बेशक "रिज़्क़" कारोबार नहीं

रज़्ज़ाक दिया करता है!!






किसी ग़रीब क़बीले की आबरू की तरह..

 हमारा दर्द किसी दर्द में शुमार नहीं।।






तूने कहा तो तेरी तमन्ना भी छोड़ दी...

तेरी किसी बात को टाला नहीं गया।।






जब तुम सुकून की कमी महसूस करो तो तौबा करो

क्यों की इंसान के गुनाह उसे बेचैन रखते हैं

...







तवील ना सही मुख़्तसर तो होगा ...

तेरे दिल की किताब में कहीं ज़िक्र मेरा।






खाते जाओ हालात के पत्थर खुद राहत हो जाएगी।

दो दिन जख्म अज़ियत देगा फिर आदत हो जाएगी।।





किसी का सुकून छीनने का कफ़्फ़ारा,


इबादत करके अदा नहीं किया जा सकता...





उठकर तो आ गये हैं तेरी बज़्म से मगर,

कुछ दिल ही जानता है कि किस दिल से आये हैं..






#भूख से #भागकर #किधर गया होगा...??


#गरीब था #साहब'....,, गुज़र गया होगा...






थोड़ा महंगा पड़ा औरों के लिए जिंदगी जीना.....

उम्र खर्च भी हुई और कुछ हाथ भी ना लगा।।






किरदार मेरा लोगों को जब आ गया समझ


नाटक में ठीक उस समय मारा गया मुझे....🚶‍♂️🚶‍♂️


کردار میرا لوگوں کو جب آگیا سمجھ


ناٹک میں ٹھیک اس وقت مارا گیا مجھے















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