यहाँ ईद के पावन और मुकद्दर मौके के लिए का एक बेहद खूबसूरत, रूहानी और अनोखा शायरी कलेक्शन है। इसमें भाईचारे, चाँद के दीदार, अपनों की याद, ईदी की खुशी और दिल को छू लेने वाले जज्बात शामिल हैं। इसे आप अपने दोस्तों, अज़ीज़ों और सोशल मीडिया पर शेयर करके ईद की मुबारकबाद दे सकते हैं।
फलक पर चाँद चमका है, समां भी कितना प्यारा है,
मुबारक हो आपको ईद, ये खुशियों का इशारा है,
दुआ है रब से कि आपकी ज़िंदगी का हर एक लम्हा,
यूं ही जगमगाता रहे जैसे आसमान का तारा है।
ईद मुबारक!
रमज़ान के मुकद्दर रोज़ों के बाद ये नूर आया है,
देखो हर तरफ खुशियों का पैग़ाम लाया है,
उठाओ हाथ दुआ में कि सब पर करम हो उसका,
रहमतों की बरखा समेट कर ईद का चाँद आया है।
उस चाँद के दीदार की खातिर मुद्दत से तरसते हैं,
जब वो नज़र आता है तो रहमत के बादल बरसते हैं,
दीदार-ए-चाँद की ये रात लाया है ढेरों खुशियाँ,
तभी तो सब गले मिलकर ईद मुबारक कहते हैं।
रात को नया चाँद मुबारक, चाँद को चाँदनी मुबारक,
फ़लक को सितारे मुबारक, और हमारी तरफ से,
आपको और आपके पूरे अहल-ए-खाना को ईद मुबारक।
न कोई छोटा रहे आज, न कोई बड़ा रहे,
हर एक इंसान मोहब्बत की सफ़ में खड़ा रहे,
मिटा दो दिलों के कीने और गले मिल जाओ आज,
कि इस ईद पर सिर्फ और सिर्फ प्यार का रंग चढ़ा रहे।
सवैयों की मिठास और अपनों का साथ हो,
दिलों में नफ़रत की न कोई बात हो,
गले मिलकर भुला दें सारे शिकवे-शिकायतें,
खुदा करे कि ऐसी हर एक की मुलाकात हो।
मस्जिद की सफ़ों से लेकर घरों के आँगन तक,
गूंज रही है तकबीरें और खुशियाँ हर धड़कन तक,
अमीर-ओ-ग़रीब सब एक ही रंग में रंगे हैं आज,
यही तो पैग़ाम-ए-ईद है जो पहुँचता है रूह तक।
अज़ान की गूंज और दुआओं का असर रहे,
आपके आशियाने पर सदा खुशियों का पहर रहे,
गले मिलकर जो मुस्कुराए आज दुशमन भी,
खुदा करे कि अमन का ये सिलसिला उम्र भर रहे।
लोग कहते हैं कि आज ईद का चाँद निकला है,
मगर मेरी ईद का चाँद तो अभी तक परदे में है,
जब तक न हो दीदार तुम्हारे हसीन चेहरे का,
हम कैसे कहें कि हमारी ईद के दिन आए हैं।
ईदी में मुझे कोई दौलत या साज़-ओ-सामान न देना,
अगर देना ही है तो अपनी ज़ुल्फ़ों का साया दे देना,
तरस रही हैं आँखें तुम्हें सामने देखने को,
इस ईद पर मुझे बस अपने दीदार का तोहफा दे देना।
तुम्हारी एक मुस्कान मेरी ईदी बन जाती है,
तुम्हारी सादगी इस दिल की बंदगी बन जाती है,
यूं तो हर दिन गुज़रता है तुम्हारी याद में,
पर ईद के दिन तुम्हारी कमी और गहरी हो जाती है।
हाथों में रची मेंहदी और आँखों में कजरा,
पहनी है तुमने जो वो गुलाबी सी पोशाक,
खुदा कसम! तुम्हारी इस एक अदा को देखकर,
ज़माने भर की ईद आज फीकी नज़र आती है।
सजदे में झुके सिर को मक़बूलियत मिल जाए,
रब की बारगाह से हर गुनाह की माफ़ी मिल जाए,
इस ईद पर बस यही मन्नत है मेरी मौला से,
कि हर रोते हुए चेहरे को ज़माने की खुशियाँ मिल जाएँ।
रहमतों की आई है झड़ी, बरकतों का पैग़ाम है,
खुदा की इबादत में गुज़री हर एक शाम है,
दुआ है कि आपकी झोली कभी खाली न रहे,
आपके हर नेक काम को रब का सलाम है।
जो मांगोगे दिल से वो सब तुमको मिल जाए,
उम्मीदों का सूखा बाग़ फिर से खिल जाए,
रब की इनायत बरसे इस कदर आपके घर पर,
कि तक़दीर का बंद ताला भी पल में खुल जाए।
केवल लिबास बदलना ही ईद नहीं होती,
दिलों को पाक साफ़ करना भी ज़रूरी है,
जब तक ग़रीब के चूल्हे में आग न जले,
तब तक अमीर की ईद भी अधूरी है
वॉट्सऐप पर स्टेटस लगा दिया है 'ईद मुबारक' का,
डीपी पर भी नूर चमक रहा है इस पावन रात का,
इससे पहले कि नेटवर्क जाम हो जाए त्योहार के शोर में,
हमने एडवांस में भेज दिया है पैग़ाम अपनी जज़्बात का।
नो फॉर्मेलिटी, नो दिखावा, ओनली प्योर लव,
ईद के इस दिन पर दुआ है फ्रॉम द गॉड अबव,
आपकी लाइफ की हर 'प्रॉब्लम' हो जाए डिलीट,
और खुशियों का नया 'वर्ज़न' हो जाए अपडेट।
गूगल पर भी नहीं मिलेगा जो सुकून अम्मी के हाथ की सवैयों में है,
वो मज़ा कहाँ पार्टी में जो अब्बू की ईदी और बाज़ुओं में है,
घर की रौनक़ों से ही सजती है असली ईद मेरे दोस्त,
वरना महफ़िल तो हर रोज़ इस शहर की गलियों में है।

बिना किसी फ़िल्टर के तुम्हारा चेहरा नूरानी लगता है,
जैसे ईद का चाँद कोई पुरानी कहानी लगता है,
इस डिजिटल ज़माने में भी जो सादगी है तुम में,
वही मेरी ईद को सबसे हसीन और रूहानी बनाता है।
परदेस में बैठी आँखों से आंसू छलक आते हैं,
जब ईद के दिन घर के आँगन याद आते हैं,
अम्मी के हाथ की वो शीर-खुरमे की महक,
और अब्बू का गले लगाना बहुत तड़पाते हैं।
मीलों की ये दूरी जिस्मों को अलग रख सकती है,
पर दिलों के तार तो धड़कनों से जुड़े हैं,
भले ही हम इस बार साथ बैठकर ईद न मना पाएँ,
पर मेरी हर एक दुआ में सिर्फ आप ही शामिल हैं।
वीडियो कॉल पर ही सही, तुम्हारा दीदार तो हुआ,
चलो इस परदेस में भी ईद का कुछ तो अहसास हुआ,
सजाए रखेंगे इन यादों को दिल के कोने में,
कि अगली ईद का सफ़र अपनों के साथ तय होगा।
सरहदें और दूरियाँ चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों,
दुआओं को सफ़र करने के लिए किसी वीज़ा की ज़रूरत नहीं होती,
दूर रहकर भी जो दिल के सबसे करीब रहते हैं,
उन्हें हमारी तरफ से ईद की मुबारकबाद सबसे पहले पहुँचती है।
हर तरफ नूर की बरसात हो,
कामयाबी से आपकी हर मुलाक़ात हो,
तमाम उम्र मुस्कुराते रहें आप फूलों की तरह,
आपकी ज़िंदगी में कभी न गम की रात हो।
कश्ती-ए-ज़िंदगी को नया किनारा मिल जाए,
डूबते हुए हौसलों को रब का सहारा मिल जाए,
इस ईद पर ऐसी बरकत बरसे आपके आशियाने पर,
कि जो आपका दिल चाहे, वो आपको दोबारा मिल जाए।
महकती रहे सवैयों की खुशबू आपके घर में,
बनी रहे रौनक और चहक हर एक पहर में,
दुआ है 'अदनान' की रब से इस मुबारक मौके पर,
कि आपका नाम सोने के अक्षरों में लिखा जाए इस जहान में।
चलो आज नफ़रत की दीवारों को ढहा देते हैं,
दिलों में मोहब्बत का एक नया चराग़ जला देते हैं,
ईद का त्योहार तो बस एक बहाना है मेरे यारों,
आओ पूरी इंसानियत को गले से लगा लेते हैं।
ईद-उल-फ़ितर की पुरख़ुलूस मुबारकबाद!

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